रस-ब्रह्म साहित्य संगीत
प्रेमचंद सबसे बड़ा हिंदी का साहित्यकार
मैं आज 2023 में प्रेमचंद को सबसे बड़ा हिंदी का साहित्यकार मानता हूं। वे मेरे प्रिय कथाकार हों मैं यह नहीं कह रहा हूं। मैं उन्हें प्रिय के अर्थ में नहीं श्रेय के अर्थ में बड़ा मानता हूं। अब मुझे उनकी साधारणता में असाधारणता समझ आने लगी है। बात सत्य है इतिहास अगर भविष्य बनाता है तो भविष्य भी इतिहास को आकार देता है। क्या वाकई में गोदान में होरी के मृत्यु के समय धनिया का अंतिम समय गोदान करना वाकई गोदान की बड़ी उपलब्धि है। क्या भारत के लिहाज से 21वीं सदी में पुरोहित वाद हीं बड़ी चीज है। या जमींदारी, सामंतवाद पुरोहित वाद या शहरी औद्योगिक करण हीं सबसे बड़ी उपलब्धि है। यह बीसवीं सदी के प्रारंभ में जितना महत्त्वपूर्ण था संभवतः अब यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ओम शांति या शहरी रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग और इस जैसे अन्य के माॅडल के बाद पुरोहीत के मालिकाना में ईश्वर को नहीं समझना चाहिए। ज़मींदार या सामंत तो रहे नहीं। और अगर समस्या है तो यह सामंत या जमींदार शब्द में नहीं मानव के भीतर की समस्या हीं ज्यादा है। तो सवाल यह भी है कि फिर प्रेमचन्द के गोदान की सबसे मज़बूत क्या चीज है या होरी नायक क्यूं है या होरी धनिया भारत के 21वीं सदी में आदर्श क्यूं है। होरी या होरी-धनिया आदर्श की कोई यूटोपिया नहीं है। यह आज के आदर्श मानव के मनोविज्ञान के अनुकूल है। जहां मानव व्यवहार में चूक जाता है और जिदंगी भर ऐसा क्यूं न किया पछताता है वहां होरी अपने खाली बांहों में बड़प्पन के सागर को समेटे होता है। होरी का न चूकना हीं इसे बड़ा बनाता है और होरी का व्यवहारिक हारा हुआ अंत मृत्यु इसे सच में मानवता का महाकाव्य बनाता है। जहां आज संसार में जीते हुए लोग आज भी मानवता के सबसे बड़े हारे हुए लोग होते हैं। प्रेमचंद महाकवि थे। उन्होंने होरी को जीताने का लोभ नहीं किया। कोई जीत का काल्पनिक बेजोड़ चित्रण नहीं किया। उन्होंने उसे मानवता के स्तर पर जीताया। जहां हम जैसे मानव चूक जाते हैं। बड़प्पन के स्तर पर प्रेमचंद मानवता का भविष्य रचते हैं। वे भारत के सबसे बड़े आस्तिक महाकवि है।
सौरभ कुमार