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जन्म समय प्राकृतिक ग्रह कुंडली (जन्म समय की ग्रहों की Map कुंडली)

अपने जीवन को सँवारने वाले प्रिय मित्रों। खुश रहें खुशहाल रहें। प्रकृति ज्योतिष में आपका स्वागत है। ज्योतिष प्रकृति का विषय है। जन्म कुंडली Horoscope आपके जन्म समय का ग्रहों का Map है। प्रकृति ज्योतिष की कुंडली आपके ग्रहों की सही ज्योतिषीय Astrological Map है। अभी हिंदी इलाके में ज्योतिष में लग्न की राशि कुंडली बनाई जाती है। ग्रहों के लिए भाव की चलित कुंडली बनाई जाती है। चलित कुंडली में ग्रह किस भाव में बैठे हैं ये देखते हैं। ग्रह किस राशि में बैठे हैं इसके लिए लग्न कुंडली की राशि देखी जाती है। कई ज्योतिषी खुद confuse रहते हैं लग्न कुंडली के ग्रह भाव चलित कुंडली में राशि भी बदल लेते हैं। उन्हें लगता है ग्रह ने अपनी राशि भी बदल ली है। ग्रह की राशि भाव बदलने से नहीं बदलती है। जो ग्रह की आकाशीय स्थिति है वही रहती है। ग्रह की आकाशीय स्थिति हीं सत्य है। अगर आप ग्रह की प्राकृतिक कुंडली बनायेंगे तो ग्रह का भाव भी सही रहेगा और राशि भी सही रहेगा। प्रकृति-ज्योतिष प्रकृति-धर्म पर आधारित है। प्रकृति ज्योतिष की एक कुंडली chart काफी है अगर एक हीं कुंडली में सही सही कुंडली की ग्रह स्थिति और राशि स्थिति और फलित देख सकते हैं। आप देखिए इन प्रचलित कुंडलियों chart में जैसा बनाया जाता है। यह 15-08-1947 की 00 AM NEW DElHI की कुंडली है। यहां वृष लग्न की कुंडली है। गुरु छठे घर में तुला राशि में है और चलित कुंडली में सप्तम घर भाव में वृश्चिक राशि में आ जा रहा है। वही चलित कुंडली में कन्या और मीन राशि की स्थिति गायब है। 

प्रकति ज्योतिष ग्रहों की प्राकृतिक और वास्तविक स्थिति पर आधारित है। जो पुराने ज्योतिष के ढ़ंग को जानते हैं वे जानते हैं जब राशि का सिर्फ राशि का नंबर लिखा जाता है तो उस राशि का राशि नंबर लिखा जाता है। जब अंश अर्थात डिग्री के साथ लिखा जाता है तो पिछली बीत गई राशि के नंबर और गुजरे अंश डिग्रा के साथ लिखा जाता है। इसे कई बार जीतने राशि बीते उतने अंश डिग्रा में जोड़ कर भी लिखा जाता है। या कई बार वर्तमान राशि को उसके राशि Zodic sighn के साथ लिखा जाता है। यहाँ ग्रह को सके बीते राशि नंबर और गुजरे अंश के साथ लिखा गया है। प्रिय मित्रों , जैसे अगर लग्न वृष राशि में 7 डिग्री गुजरा है तो इसे लग्न स्पष्ट अर्थात लग्न के भाव मध्य पहले घर के मध्य में 1 07* लिखा गया है। इसी तरहे से भाव आरंभ,  भाव मध्य और भाव का अंत लिखा हुआ है। इसी तरह से ग्रहों को भी उनके वास्तविक स्थिति में लिखा गया है। कुंडली स्पष्ट है। कुंडली में समय शुद्धि भी जरूरी है। लग्न राशि भावों के अंश शुद्धि भी जरूरी है। तभी लग्न, ग्रह और भाव के अंश अर्थात degree सही आते हैं।

प्राकृतिक कुंडली में लग्न और भाव के भाव मध्य आदि और अंत स्पष्ट है। ग्रह भी उसी हिसाब से रखे गए हैं। आप बिना उलझन के स्पष्टतया वर्णन रखा हुआ देख सकते हैं। आप थोड़ा समय और ध्यान लगायेंगे तो कुंडली काफी स्पष्ट हो जायेगा। ग्रह, लग्न, राशि भाव की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जायेगा। कुंडली की प्रकृति की ग्रहों की वास्तविक स्थिति है। reality की कुंडली है। यह स्पष्ट दिखना जरूरी है। आप इस तरह से कुंडली बना भी सकते हैं और देख भी सकते हैं। आप को लग्न, भाव चलित कुंडली नहीं देखना है। बार- बार उलझना नहीं है। एक हीं प्रकृति ज्योतिष कुंडली  Horoscope काफी आसान है। फलादेश धीरे-धीरे आपको स्पष्ट होते जायेंगे 

आपका ज्योतिष का मार्ग शुभ हो। मैं आपका पुराना साथी सौरभ कुमार प्रकृति धर्म के प्रकृति ज्योतिष 'ASTRO-SPIRITUAL-MOTIVATION में पुन: स्वागत करता हूं। 


धन्यवाद 

‘खुश रहो, खुशहाल रहो।’

शुभमस्तु 

सौरभ कुमार 


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