Prakriti Dharma
हे प्रकृति हासिनी, आनंद प्रदायिनी
हे प्रकृति हासिनी, आनंद प्रदायिनी
हे प्रकृति हासिनी, आनंद प्रदायिनी
भव भय मोचिनी, ज्योति प्रदायिनी
अज्ञान हरणी माँ, सत्वज्ञान प्रकाशिनी
ममता आधारणी, करूणा प्रसारिणी
करूणा लुटाती माँ, ज्योति विलासनी
लीला जगत माँ, तू है प्रसारती
हे प्रकृति हासिनी, सृष्टि स्वरूपिणी
जीवण वीणा की माँ, तू है वादिनी
शाश्वत प्रवाह माँ, तू है प्रवाहिनी
हास्य कर प्रकट माँ, तू है जननी
लीला जगत की माँ, तू है रक्षिणी
अंतर्धान करती माँ, रहती तू हँसती
हे प्रकृति हासिनी, शाश्वत आकर्षिणी
पार के भी पार माँ, ले जाती तू मोहिनी
पल पल आनंद माँ, लीला आनंदिनी
हर पल नवीन माँ, आनंद सृजनी
आनंदी आनंदमयी, आनंद स्वभाविनी
पूर्ण चित् शक्ति सत्, पूर्ण स्वामिनी
सौरभ कुमार