Prakriti Dharma
प्रकृति धर्म / सनातन संस्कृति
इस गुणमयी स्वरूपवान ब्रह्म की उपासना स्वीकार भाव से कर हीं आत्मा अध्यात्म को उपलब्ध कर पाता है। ब्रह्म सगुण साकार के साथ गुणवान निराकार तो होता है। ब्रह्म सगुण निराकार या बिंदु रूप (अलौकिक या त्रिगुणातीत ) तो हो सकता है परंतु निर्गुण निराकार की कोई उपलब्धि की संभावना आध्यात्मिक या वैज्ञानिक रूप में नहीं हो पाती है। निर्गुण-निराकार कह कर संपूर्ण को अस्वीकार नहीं करना चाहिए। मानव चेतना के लिए निराकार बिना गुण के लगने पर भी वह अपनी अलग विशेषता रखती है। ध्यान देने की बात है गुण सिर्फ त्रिगुण नहीं होता है।
H2 (हाइड्रोजन ) + O (ऑक्सीजन) मिलकर = H2O (जल) बनते हैं। हाइड्रोजन का गुण है जलना और ऑक्सीजन का गुण है जलाना लेकिन जल का गुण आग बुझाना है जो उन दोनों से अलग है। इसी रूप में प्रकृति ब्रह्म की चेतना प्रकृति के गुण से अलौकिक या त्रिगुणातीत समझी जा सकती है। यह साम्यावस्था का गुण है जो शुद्ध-मुक्त है और सिद्ध आनंदित है। लेकिन आज कम्प्यूटर के युग में जो खुद व्यवस्था से चालित है, कौन कहना चाहेगा कि यह ब्रह्म-प्रकृति व्यवस्था से हीन हो सकती है। साथ हीं यह व्यवस्था नैतिक के साथ हीं आध्यात्मिक भी है।
आज की संस्कृति विस्तृत संस्कृति है जो सनातन संस्कृति (प्रकृति धर्म) से हीं चालित होगी। यह हिंदू + सिक्ख + जैन + बौद्ध + पारसी + ईसाई + इस्लाम के एक रूप से चालित नहीं हो पायेगी। आज राम + कृष्ण + बुद्ध + महावीर + नानक जितने महत्वपूर्ण हैं जरथ्रुस्ट + लाओत्से + कन्फ्यूसियस भी उतने हीं महत्वपूर्ण है। जीसस + मुहम्मद की शिक्षा का भी अपना महत्व है। यशोदा मैया के गोद में भगवान कृष्ण के वात्सल्य-शक्ति के बाद हीं मरियम के गोद में ईसा के रस को समझा जा सकता है। आज राधा-कृष्ण के प्रेम को अपने से छोटे उम्र के पति की स्वीकार्यता की संस्कृति में हीं ढलने से समझा जा सकता है।
आज का योग कर्म+ज्ञान+भक्ति(प्रेम) का रस-पूर्ण योग है। यह व्यवस्था चालित राजयोग है। यह सिर्फ तन या मन का योग नहीं है। यह शरीर + प्राण + मन को स्वस्थ कर अपने में स्थित कर संपूर्ण अस्तित्व को प्रेम करने वाला योग है। जो परलोक या मोक्ष का केवल प्रलोभन नहीं देता। सिद्धि या देवदर्शन का केवल आश्वासन नहीं देता। विकार के शांत होने पर परमानंद देता है। निज लोक के सुधरने से परलोक या लोक बाद के अस्तित्व के सुधरने का प्रत्यक्ष अनुभव देता है।
सौरभ कुमार