Prakriti Dharma
जिसे ब्रह्म कहते हैं, प्रकृति तुम हो
जिसे ब्रह्म कहते हैं, प्रकृति तुम हो
जिसे ब्रह्म कहते हैं, प्रकृति तुम हो
जिसे ब्रह्म कहते हैं, प्रकृति तुम हो
सब जीवों की उत्पत्ति तुम हो
सब जीवों की उत्पत्ति तुम हो
जिसे ईश्वर कहते हैं, प्रकृति तुम हो
जिसे ईश्वर कहते हैं, प्रकृति तुम हो
ब्रह्म-कोष की केन्द्रक ईश्वर तुम हो
ब्रह्म-कोष की केन्द्रक ईश्वर तुम हो
चेतन-अचेतन की सृष्टि तुम्हीं हो
चेतन-अचेतन की सृष्टि तुम्हीं हो
तुम ही कारण, सब कार्य तुम्हीं हो
तुम ही कारण, सब कार्य तुम्हीं हो
तुम ही स्थिति, लय भी तुम्हीं हो
तुम ही स्थिति, लय भी तुम्हीं हो
तुम ही नाद, सूक्ष्म बिंदु तुम्हीं हो
तुम ही नाद, सूक्ष्म बिंदु तुम्हीं हो
ऋण-धन की अद्भुत, धारा तुम्हीं हो
ऋण-धन की अद्भुत, धारा तुम्हीं हो
सत्-रज्-तम् की सृष्टि तुम्हीं हो
सत्-रज्-तम् की सृष्टि तुम्हीं हो
धर्म-अर्थ-काम की लीला तुम्हीं हो
धर्म-अर्थ-काम की लीला तुम्हीं हो
मोक्ष की प्रकृति गोद तुम्हीं हो
मोक्ष की प्रकृति गोद तुम्हीं हो
सौरभ कुमार