Prakriti Dharma

जिसे ब्रह्म कहते हैं, प्रकृति तुम हो

जिसे ब्रह्म कहते हैं, प्रकृति तुम हो

सब जीवों की उत्पत्ति तुम हो 

जिसे ईश्वर कहते हैं, प्रकृति तुम हो

ब्रह्म-कोष की केन्द्रक ईश्वर तुम हो 


चेतन-अचेतन की सृष्टि तुम्हीं हो 

तुम ही कारण, सब कार्य तुम्हीं हो

तुम ही स्थिति, लय भी तुम्हीं हो

तुम ही नाद, सूक्ष्म बिंदु तुम्हीं हो 


ऋण-धन की अद्भुत, धारा तुम्हीं हो

 सत्-रज्-तम् की सृष्टि तुम्हीं हो

धर्म-अर्थ-काम की लीला तुम्हीं हो

मोक्ष की प्रकृति गोद तुम्हीं हो


सौरभ कुमार


प्रकृति धर्म

प्रकृति ज्योतिष

Astro-Spiritual-Motivation

रस-ब्रह्म साहित्य संगीत

YouTubeTwitterFacebookInstagramPinterest